हाफ़िज़ सईद को पाकिस्तान में मिली सज़ा का क्या FATF की बैठक से कोई कनेक्शन है?

पाकिस्तान में मुंबई हमलों के प्रमुख साज़िशकर्ता बताए जाने वाले जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद को बुधवार को प्रतिबंधित संगठन से जुड़ाव और 'आतंकवाद' के लिए ग़ैर-क़ानूनी फ़ंडिंग के दो अलग-अलग मामलों में साढ़े पाँच साल जेल की अलग-अलग सज़ा सुनाई गई है.

जेल की सज़ा के अलावा अदालत ने उन पर 15 हज़ार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

लाहौर स्थित आतंकवाद-विरोधी अदालत ने लाहौर और गुजरांवाला में दायर दो अलग मामलों में अलग-अलग सज़ा सुनाई.

लेकिन दिलचस्प बात ये है कि यह फ़ैसला पेरिस में होने वाली फ़ाइनैंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) की बैठक से चार दिन पहले आया है. पाकिस्तान ख़ुद पर आर्थिक प्रतिबंध लगने से बचने की भरपूर कोशिश कर रहा है और इस फ़ैसले को इसी बैठक की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है.

हाफ़िज़ मोहम्मद सईद और उनके साथी ज़फ़र इक़बाल को 'आतंकवाद' के लिए पैसा जुटाने, ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से फंड जुटाना और प्रतिबंधित संगठन का सदस्य होने के आरोपों में दोषी ठहराया गया.

जज अरशद हुसैन भट्ट ने हाफ़िज़ सईद को एंटी टेररिज्म सेक्शन XII और 11N के तहत सज़ा सुनाई. क़ानूनी जानकारों के मुताबिक़, एंटी टेररिज़्म एक्ट के आर्टिकल X में प्रतिबंधित संगठन से जुड़े होने पर सज़ा का प्रावधान है.

पाकिस्तानी पंजाब के काउंटर टेररिज़्म डिपार्टमेंट (CTD) ने बड़े स्तर पर जमात-उद-दावा, लश्कर-ए-तैय्यबा और वेलफ़ेयर ह्यूमनिटी फ़ाउंडेशन की जांच शुरू की थी.

सीटीडी के मुताबिक़, इन संगठनों ने आतंकवाद के लिए ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से जुटाए गए पैसों से ज़मीन ख़रीदी और यहां मदरसे और मस्जिद बनाकर इनका इस्तेमाल और पैसे जुटाने के लिए किया.

सीटीडी ने यह भी पाया कि इन संगठनों ने अलग-अलग एनजीओ और दूसरे वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के नाम पर पैसे जुटाए.

एंटी टेररिज़्म डिपार्टमेंट के मुताबिक़, हाफ़िज़ सईद और 12 अन्य के ख़िलाफ़ ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से पैसे जुटाने और आतंकवाद के लिए इस्तेमाल करने और एंटी टेररिज्म एक्ट 1997 के तहत ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से पैसे जुटाने के आरोप में भी कार्रवाई की जा रही है और उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने जनवरी 2015 में घोषणा की थी कि सभी चरमपंथी संगठनों, जिनमें जमात-उद-दावा भी शामिल है, की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है.

पाकिस्तान ने साल 2015 में जमात उद दावा पर प्रतिबंध लगा दिया था. हाफ़िज़ सईद जमात उद दावा के प्रमुख हैं. किसी भी प्रतिबंधित संगठन से जुड़ाव ग़ैर-क़ानूनी है और इसी मामले में हाफ़िज़ सईद को दोषी ठहराते हुए साढ़े पाँच साल की सज़ा सुनाई गई है.

वहीं दूसरा मामला 'आतंकवाद' के लिए ग़ैर-क़ानूनी फ़ंडिंग का है. यह फंडिंग भी जमात उद दावा और दूसरे संगठनों के ज़रिए ही की जा रही थी. इस मामले में भी हाफ़िज़ सईद को साढ़े पाँच साल की सज़ा दी गई है.

बीबीसी उर्दू संवाददाता आसिफ़ फ़ारूक़ी के मुताबिक़, यह फ़ैसला एफ़एटीएफ़ में पाकिस्तान के लिए मददगार साबित हो सकता है.

उन्होंने कहा, ''पिछली बैठक में एफ़एटीएफ़ का कहना था कि पाकिस्तान कार्रवाई भले ही दिखा रहा हो लेकिन चरमपंथ के मामलों में उसने किसी को सज़ा नहीं दी, ऐसे में यह मामला एक नज़ीर की तरह पेश किया जा सकता है कि हमने इतने बड़े शख़्स को दोषी ठहराया है और सज़ा भी दी है. इसका लाभ भी उसे मिल सकता है. लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि एफ़एटीएफ़ की वजह से ही यह फ़ैसला लिया गया है. यह अदालती कार्रवाई है और उसी के तहत फ़ैसला आया है.''

हालांकि इस्लामाबाद से वरिष्ठ पत्रकार हारून रशीद कहते हैं कि यह सब कुछ एफ़एटीएफ़ के दबाव में ही किया गया है. क्योंकि इसके पहले भी कई बार हाफ़िज़ सईद और दूसरे लोगों के ख़िलाफ़ मामले दर्ज हुए और अदालतों में भी गए लेकिन सबूत ना होने का हवाला देकर उन्हें छोड़ दिया जाता था.

वो कहते हैं, ''अब अचानक से सबूत कहां से आ गए, यह सवाल उठ रहा है और अब सरकार को इसका जवाब देना है. लगता यही है कि एफ़एटीएफ़ के दबाव में ही सरकार ये क़दम उठा रही है क्योंकि इस तरह के क़रीब 600-700 मामले हैं जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के लिए फंड जुटाने के आरोप हैं, उनमें से यह पहला बड़ा मुक़दमा है जिसमें सज़ा हुई है और एफ़एटीएफ़ वाले इनसे जवाब भी मांग रहे थे कि इन मामलों में ना सुनवाई हो रही ना ही सज़ा हो रही, तो प्रक्रिया सुधारी जाए.''

हालांकि वो मानते हैं कि इस सज़ा से हाफ़िज़ सईद की ज़िंदगी में कुछ ख़ास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वो पहले भी गिरफ़्तार होकर जेल में रहे हैं और सार्वजनिक जीवन से बाहर रहते थे लेकिन एफ़एटीएफ़ में इसका फ़ायदा पाकिस्तान को ज़रूर मिलेगा और शायद वो ग्रे लिस्ट से बाहर निकल जाए.

Comments

Popular posts from this blog

Unerwarteter Ärger mit dem Eigenheim

पश्चिम बंगाल में दांव पर है मोदी और ममता की साख: चुनाव 2019

Ветераны-"афганцы" и герои России проведут в субботу митинг на проспекте Сахарова