पीएम ने जान बूझ कर पुलवामा में जवानों को मरने दिया: ममता- पांच बड़ी ख़बरें

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर लोकसभा चुनावों से पहले पुलवामा के जवानों की मौत पर राजनीति करने का आरोप लगाया है.

ममता बनर्जी ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुलवामा हमला होने की जानकारी पहले से थी.

उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के 2500 जवानों को हवाई मार्ग से नहीं भेजा गया और इसके बजाय उनके मार्ग की उचित जांच किए बिना क़ाफ़िले में यात्रा करने की अनुमति दी गई.

ममता बनर्जी ने कहा, "केंद्र सरकार को पता था कि इस तरह का हमला हो सकता है, इस बारे में ख़ुफ़िया सूचनाएं थीं, बावजूद हमारे जवानों को बचाने के लिए सरकार ने क़दम क्यों नहीं उठाया."

"सरकार ने उन्हें मरने दिया ताकि वो चुनाव में जवानों की शहादत पर राजनीति कर सकें."

समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में भी मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. उत्तर प्रदेश के बाद इन दो राज्यों में भी गठबंधन का आधिकारिक ऐलान किया गया है.

सपा इन तीनों राज्यों में बसपा की जूनियर पार्टनर होगी. मध्यप्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं, जिनमें से बसपा ने सपा को तीन सीटें देने का वादा किया है.

वहीं उत्तराखंड की पांच सीटों में से सपा को एक सीट दी जाएगी. यह जानकारी अखिलेश यादव और मायावती के संयुक्त हस्ताक्षर वाले पत्र से दी गई है.

अरुणाचल में कर्फ़्यू, लेकिन लोग सड़कों पर, सेना ने लगाई गश्त

अरुणाचल प्रदेश में छह समुदायों को स्थायी आवास प्रमाण पत्र देने की सिफ़ारिश का विरोध बढ़ता जा रहा है.

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री आवास पर हमले के बाद राजधानी ईटानगर में कर्फ्यू लगा दिया गया था, फिर भी लोग सड़कों पर उतर आए.

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कर्फ़्यू लगाने का फ़ैसला किया था लेकिन प्रदर्शनकारियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा.

सुरक्षा के मद्देनज़र सेना को इलाक़े में गश्त लागनी पड़ी. छह समुदायों को स्थायी आवास प्रमाण पत्र देने की सिफ़ारिश के बाद हिंसा में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है.

सुप्रीम कोर्ट राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में मंगलवार को सुनवाई करेगा.

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई समेत पांच जजों की संविधान पीठ करेगी.

इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2010 के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में 14 अपीलें दाख़िल की गई थीं.

ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. ज़रीफ़ ने अपने इस्तीफ़े की घोषणा इंस्टाग्राम पर की.

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने ज़रीफ़ के इस्तीफ़े की पुष्टि की है. उन्होंने सरकार में अपने कार्यकाल के दौरान हुई ग़लतियों के लिए माफ़ी भी मांगी.

ज़रीफ़ ने 2015 में अमरीका के साथ परमाणु समझौते के दौरान अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन बाद में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस समझौते को रद्द कर दिया था.

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